Friday, September 4, 2015

Gopal Babu Goswami -Folk Singer of Uttarakhand

Gopal Babu Goswami is a legend of Kumaoni music.He was one of the superstar of Uttarakhandi Music during his time. Gopal Babu Goswami was born on 2nd February 1941 at village Chandikot, Chaukhutia, Almora. In his family he was having father Mohan Giri, Mother Chanuli devi and sister Radha devi. He spent his child hood under great difficulties. His father died before Gopal could pass out from class 8th. The main profession of his father was agriculture. After the death of his father the entire responsibility of his family came to him. There was no one to guide him at that time. He left for Delhi for the search of some job. He has done various jobs in Delhi, Punjab and Himachal but he could not get permanent and satisfying job so he returned back to his village in 1970.
in 1970 a team of Song and Drama Division, Nainital* was visiting Chaukhutia where they met Gopal and got impressed after listening to his songs.

मधुर कंठ - गोपाल बाबु गोस्वामी जी का परिचय

गोपाल बाबु का जन्म अल्मोड़ा जनपद की पली पछाऊंतहशीलपट्टी गेवाड़ घाटी चौखुटियाग्राम चांदिखेत में 2फरवरी 1941 को मोहन गिरी एंव चनुली देवी के घर हुआ गोपाल बाबु ने प्राइमरी की शिक्षा चौखुटिया के सरकारीस्कुल से ली  5वीं पास करने के बाद मिडिल स्कुल मेंनाम लिखवाया परन्तु 8वीं उत्तीर्ण करने से पूर्व ही पिता कादेहावसान हो गया  नाथ संप्रदाय के होने के बावजूत भीउनके पिता का मुख्य व्यवसाय कृषि था  गोपाल बाबु जीयुवा भी नही हो सके थे कि नौकरी करने पहाड़ केबेरोजगार युवाओं कि परम्परानुसार दिल्ली चले गये कईवर्षों तक नौकरी की तलाश में रहे प्राइवेट नौकरी की,कुछ वर्ष डीजीआरएसा आकस्मिक कर्मचारी के रूपमें कार्यरत रहे परन्तु स्थाई नही हो सके  इस दौरान वेदिल्लीपंजाबहिमांचल में रहे। पक्की नौकरी  मिलसकने के कारण उन्हें गाँव वापस आना पड़ा और खेती के कार्य करने लगे 
1970 में जब गीत और नाटक प्रभाग का एक दल कार्यक्रम देने चौखुटिया क्षेत्र में गया तबसंयोग से उन का परिचय गोपाल बाबु गस्वामीजी से हुआउस समय वे एक दुकान परहारमोनियम छेड़ रहे थे  उन्होंने चाय पिने के बहने से गोपाल बाबु से गाना गाने का आग्रहकिया  गोपाल बाबु ने उन्हें गाना सुनाये  धीरे धीरे उन लोगों का परिचय होने लगा तद्पश्च्यत गोस्वामी जी ने नाटक प्रभाग में भर्ती होने का तरीका पूछा  नाटक विभाग सेआये हुए व्यक्ति ने उन्हें नैनीताल केंद्र का पता दिया और कहा की आप के प्रार्थना पात्र भेजदेना  साक्षात्कार में बुयायेंगे तो वहीँ वार्ता होगी 
1971  में उन्हें गीत और नाटक प्रभाग  में नियुक्ति मिल गई  इस से पूर्व भी गोपाल बाबुकुमाउनी गीत गाते थे  परन्तु चर्चित गायकों में से नही थे  प्रभाग के मंच पर कुमाउनी गीतगाने से उन्हें  दिन प्रतिदिन सफलता  मिलते  रही  धीरे धीरे वे चर्चित होने लगे  इसी दौरानउन्होने आकाशवाणी लखनऊ में अपनी स्वर परीक्षा करा ली। वे आकाशवाणी के गायक भीहो गये   वे लखनऊ में अपना पहला गीत "कैले बजे मुरूली  बैणा"  गया था आकाशवाणी नजीबाबाद  अल्मोड़ा से उनके गीत के लोकप्रियता बढ़ने लगी  उन्हें बी हाईग्रेट मिल गया  उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि उनके मित्रो ने उन्हें कैसेट  निकलने कोकहा  1976 में उनका पहला कैसेट  एचएमवी ने बनाया था  उनके कुमाउनी गीतों केकैसेट काफी प्रचलित हुए पौलिडोर कैसेट कंपनी के साथ उनके गीतों का लम्बा दौर चला उनके मुख्य कुमाउनी गीतों के कैसेट में थे - हिमाला का ऊँचो डाना प्यारो मेरो गांवछोड़ देमेरो हाथा में ब्रह्मचारी छोंभुर भुरु उज्याव हैगोयो पेटा खातिरघुगुती  बासाआंखी तेरीकाई-काईतथा जा चेली जा स्वरास 
लोगों ने भी बहुत पसंद किया गोस्वामी जी का कंठ मधुर था ही  उनमें यह भी विशेषता थीकी वे उचे पिच के गीतों को भी बड़े सहज ढंग से गाते थे ऊँचे पिच के कारण से उन्हें कुमाऊंका चंचल भी कहा जाता था  उन्होंने कुछ युगल कुमाउनी गीतों के भी कैसेट बनवाए  गीतऔर नाटक प्रभाग की गायिका श्रीमती चंद्रा बिष्ट के साथ उन्होंने लगभग 15 कैसेट बनवाए 
गोस्वामी जी ने कुछ कुमाउनी तथा हिंदी पुस्तकें भी लिखी थी । जिसमें से मुख्य रूप से "गीत माला (कुमाउनी)" "दर्पण" "राष्ट्रज्योती (हिंदी)" तथा "उत्तराखण्ड" आदि । एक पुस्तक "उज्याव" प्रकाशित नही हो पाई । उनके गाये अधिकांश कुमाउनी गाने स्वरचित थे । मालूशाही तथा हरुहित के भी उन्होंने कैसेट बनवाए थे । 55 बर्ष की आयु में उन्होंने अनेक उतार-चढ़ाव देखे । पिता के मृत्यु के पश्चात् उनका कोई मार्गदर्शक या देख-भाल करने वाला कोई नही था । उन्होने स्वयं अपना मार्गदर्शन किया । कुछ वर्ष पूर्व उन्हें ब्रेन ट्यूमर हो गया था । उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली में आपरेशन भी करवाया । परन्तु वे स्वस्थ नही हो सके 26-नवम्बर 1996 को उनका असामयिक निधन हो गया और हमने खो दिए महान गायक, एक मधुर कंठ और एक विशिष्ट स्वर । वे हमारे बिच नही रहे पर उनके स्वर आज और आगे सैकड़ों वर्षो तक पहाड़ में गूंजते रहंगे  |
पहाड़ नामक मैगजीन से लिए गया है ।

2 comments: